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अनंत चतुर्दशी 2026 कब है तिथि, शुभ मुहूर्त और गणेश विसर्जन का महत्व

23 सित॰
6 मिनट पठन

गणेशोत्सव का सबसे भावुक दिन वही होता है, जब भक्त “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” कहते हुए बप्पा को विदा करते हैं। इसी दिन अनंत चतुर्दशी भी मनाई जाती है, जो भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा का विशेष पर्व है। वर्ष 2026 में यह पावन दिन 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को पड़ेगा।


यह तिथि दो बड़े धार्मिक भावों को साथ लेकर आती है। एक ओर गणेश जी का विसर्जन होता है, दूसरी ओर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा कर जीवन में स्थिरता, रक्षा और शुभता की कामना की जाती है। इसलिए यह दिन केवल उत्सव का समापन नहीं, बल्कि संकल्प, श्रद्धा और नई शुरुआत का प्रतीक भी है।


Wide-angle view of a decorated Ganesh idol near a water body for visarjan
अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन श्रद्धा और विदाई का भाव लेकर आता है।

अनंत चतुर्दशी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त


वर्ष 2026 में अनंत चतुर्दशी 2026 कब है तिथि, शुभ मुहूर्त और गणेश विसर्जन का महत्व जानने के लिए सबसे पहले पंचांग की मूल जानकारी देखना जरूरी है। यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है।


जानकारी

विवरण

पर्व

अनंत चतुर्दशी

तारीख

25 सितंबर 2026

दिन

शुक्रवार

पक्ष

भाद्रपद शुक्ल पक्ष

तिथि

चतुर्दशी

प्रमुख पूजा

भगवान अनंत, श्रीहरि विष्णु की पूजा

विशेष परंपरा

गणेश विसर्जन


पूजन का शुभ समय


अनंत चतुर्दशी की पूजा सामान्य रूप से चतुर्दशी तिथि में सूर्योदय के बाद की जाती है। 2026 में पूजा के लिए शुक्रवार, 25 सितंबर का दिन माना जाएगा। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है, इसलिए अपने शहर के पंचांग से अंतिम समय अवश्य मिलाएं।


सामान्य रूप से इस दिन पूजा के लिए ये समय शुभ माने जाते हैं।


पूजा कार्य

उपयुक्त समय

अनंत भगवान की पूजा

सुबह से दोपहर तक

व्रत संकल्प

स्नान के बाद, प्रातःकाल

अनंत सूत्र बांधना

पूजा के बाद शुभ मुहूर्त में

गणेश विसर्जन

चतुर्दशी तिथि में, परिवार और स्थानीय परंपरा के अनुसार


अगर घर में गणेश जी की स्थापना हुई है, तो विसर्जन से पहले विधिपूर्वक आरती, नैवेद्य और क्षमा प्रार्थना की जाती है। इसके बाद बप्पा को सम्मानपूर्वक जल में विसर्जित किया जाता है।


समय और तिथि पंचांग की गणना पर आधारित होते हैं। अलग स्थानों पर सूर्योदय और स्थानीय परंपरा के कारण मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है।

अनंत चतुर्दशी क्या है और इसे क्यों मनाया जाता है


अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु के “अनंत” स्वरूप को समर्पित पर्व है। “अनंत” का अर्थ है जिसका अंत न हो। इस दिन भक्त भगवान विष्णु से जीवन में सुख, रक्षा, समृद्धि और धैर्य की प्रार्थना करते हैं।


धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन अनंत भगवान की पूजा करने से कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है और परिवार में शांति बनी रहती है। कई लोग इस दिन अनंत व्रत भी रखते हैं। पूजा के बाद एक विशेष धागा, जिसे अनंत सूत्र कहा जाता है, बांधा जाता है।


अनंत सूत्र में प्रायः 14 गांठें लगाई जाती हैं। ये 14 लोकों और जीवन के अलग-अलग पक्षों का प्रतीक मानी जाती हैं। पुरुष इसे सामान्य रूप से दाहिने हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में बांधती हैं, हालांकि कई घरों में अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार नियम अपनाए जाते हैं।


इस पर्व का भाव बहुत सरल है। मनुष्य जीवन में सब कुछ अपने नियंत्रण में नहीं रख सकता। अनंत चतुर्दशी उस विश्वास को मजबूत करती है कि ईश्वर की कृपा, संयम और सही कर्म जीवन को संभाल सकते हैं।


Close-up view of an Anant sutra with fourteen knots placed beside flowers
अनंत सूत्र की 14 गांठें इस व्रत की प्रमुख पहचान मानी जाती हैं।

अनंत चतुर्दशी की पूजा विधि


अनंत चतुर्दशी की पूजा बहुत कठिन नहीं होती, लेकिन इसे श्रद्धा और शुद्ध भाव से करना चाहिए। घर में उपलब्ध सामग्री से भी पूजा की जा सकती है। मुख्य बात है संकल्प और विश्वास।


पूजा सामग्री


पूजा के लिए सामान्य रूप से ये वस्तुएं रखी जाती हैं।


  • भगवान विष्णु या अनंत भगवान का चित्र या प्रतीक

  • पूजा चौकी और स्वच्छ कपड़ा

  • कलश

  • रोली, हल्दी, अक्षत और चंदन

  • पुष्प और तुलसी दल

  • धूप, दीप और नैवेद्य

  • पंचामृत या शुद्ध जल

  • अनंत सूत्र

  • मौसमी फल और मिठाई


पूजा करने की सरल विधि


सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान को साफ करें और भगवान विष्णु का चित्र या प्रतीक स्थापित करें। कलश रखें और दीप जलाएं।


इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप किया जा सकता है। तुलसी दल, पुष्प, अक्षत, चंदन और नैवेद्य अर्पित करें।


पूजा के बाद अनंत सूत्र को भगवान के चरणों में रखकर प्रार्थना करें। फिर इसे हाथ में बांधें। परिवार के सभी सदस्य अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा में शामिल हो सकते हैं।


पूजा के समय यह भाव रखा जाता है कि घर में सुख, रक्षा, धैर्य और सद्बुद्धि बनी रहे। अगर व्रत किया जा रहा है, तो अपनी क्षमता के अनुसार नियम रखें। व्रत में दिखावे से अधिक संयम और सच्ची भावना का महत्व है।


गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी का संबंध


गणेश चतुर्थी से शुरू हुआ उत्सव अनंत चतुर्दशी पर पूर्ण होता है। कई स्थानों पर गणेश जी की स्थापना 10 दिनों तक की जाती है और फिर चतुर्दशी तिथि पर विसर्जन होता है। इसलिए यह दिन गणेश भक्तों के लिए बहुत खास होता है।


गणेश जी को घर लाना शुभता, बुद्धि और मंगल का स्वागत माना जाता है। विसर्जन यह याद दिलाता है कि जीवन में हर रूप बदलता है, लेकिन ईश्वर की उपस्थिति बनी रहती है। मूर्ति जल में मिल जाती है, पर श्रद्धा हृदय में रहती है।


विसर्जन से पहले भक्त गणेश जी की अंतिम आरती करते हैं। मोदक, लड्डू, नारियल और फल का भोग लगाया जाता है। फिर बप्पा से प्रार्थना की जाती है कि घर की भूल-चूक क्षमा करें और अगले वर्ष फिर पधारें।


गणेश विसर्जन का आध्यात्मिक संदेश


गणेश विसर्जन केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं है। यह जीवन का बड़ा संदेश देता है।


  • शुरुआत और समापन दोनों जरूरी हैं

  • आसक्ति छोड़ना भी भक्ति का हिस्सा है

  • प्रकृति से आया हर तत्व प्रकृति में लौटता है

  • हर विदाई में अगली वापसी की आशा छिपी होती है


इसी कारण विसर्जन के समय कई भक्त भावुक हो जाते हैं। यह दुख नहीं, बल्कि प्रेम और कृतज्ञता का भाव होता है।


Eye-level view of devotees carrying a small eco-friendly Ganesh idol for immersion
गणेश विसर्जन के समय भक्त बप्पा को प्रेम और श्रद्धा से विदा करते हैं।

गणेश विसर्जन करते समय किन बातों का ध्यान रखें


आज के समय में विसर्जन करते हुए पर्यावरण का ध्यान रखना भी धार्मिक जिम्मेदारी है। भगवान गणेश प्रकृति से जुड़े देवता माने जाते हैं। इसलिए पूजा और विसर्जन दोनों में प्रकृति का सम्मान होना चाहिए।


सबसे अच्छा तरीका है कि मिट्टी की मूर्ति का प्रयोग किया जाए। मूर्ति में प्राकृतिक रंग हों तो जल प्रदूषण कम होता है। घर में छोटी मूर्ति हो तो बाल्टी या बड़े पात्र में भी विसर्जन किया जा सकता है। विसर्जन के बाद उस जल को पौधों में डाला जा सकता है।


नदी, तालाब या समुद्र में विसर्जन करते समय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। भीड़ वाले स्थानों पर बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। अगर स्थानीय निकाय ने कृत्रिम तालाब बनाए हों, तो उनका उपयोग करें।


विसर्जन के दौरान ये बातें याद रखें।


  • प्लास्टिक की सजावट जल में न डालें

  • फूल और पूजन सामग्री अलग से एकत्र करें

  • मूर्ति को सम्मानपूर्वक विसर्जित करें

  • तेज आवाज या अव्यवस्था से बचें

  • जल स्रोतों की स्वच्छता का ध्यान रखें


धर्म का उद्देश्य केवल कर्मकांड नहीं है। जब पूजा के साथ करुणा और जिम्मेदारी जुड़ती है, तो उसका प्रभाव और गहरा हो जाता है।


अनंत चतुर्दशी पर क्या करें और क्या न करें


अनंत चतुर्दशी पर पूजा, व्रत और विसर्जन के साथ मन की शुद्धता को विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन झूठ, कटु वाणी और क्रोध से बचने की सलाह दी जाती है।


इस दिन क्या करें


सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। घर और पूजा स्थान को स्वच्छ रखें। भगवान विष्णु और गणेश जी की पूजा करें। अगर व्रत रखते हैं, तो नियमों का पालन करें। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना भी शुभ माना जाता है।


गणेश विसर्जन से पहले परिवार के साथ आरती करें। बप्पा से आशीर्वाद मांगें और अगले वर्ष पुनः आगमन की प्रार्थना करें।


इस दिन क्या न करें


पूजा में जल्दबाजी न करें। विसर्जन के दौरान मूर्ति या पूजा सामग्री का अनादर न करें। जल स्रोतों को गंदा न करें। व्रत करने पर शरीर की क्षमता को नजरअंदाज न करें। अगर स्वास्थ्य ठीक न हो, तो श्रद्धा से सामान्य पूजा भी की जा सकती है।


परंपराएं घर-घर में अलग हो सकती हैं। इसलिए अपने परिवार की रीति और स्थानीय पंडित या पंचांग के अनुसार पूजा करना अच्छा माना जाता है।


Top-down view of a home puja thali prepared for Anant Chaturdashi
घर में सरल पूजा सामग्री से भी अनंत चतुर्दशी की पूजा श्रद्धा के साथ की जा सकती है।

अनंत चतुर्दशी 2026 का धार्मिक महत्व


25 सितंबर 2026, शुक्रवार का दिन भक्तों के लिए विशेष रहेगा, क्योंकि यह दिन भक्ति के दो सुंदर रूपों को साथ लाएगा। भगवान विष्णु की अनंत पूजा जीवन में संतुलन और संरक्षण का भाव देती है। गणेश विसर्जन हमें विनम्रता, कृतज्ञता और परिवर्तन को स्वीकार करना सिखाता है।


अनंत चतुर्दशी का मूल संदेश यही है कि जीवन में कठिनाइयां आएं, फिर भी विश्वास बना रहना चाहिए। गणेश जी बुद्धि और विघ्नहर्ता के रूप में मार्ग दिखाते हैं। भगवान विष्णु अनंत रूप में संरक्षण और स्थिरता का आश्वासन देते हैं।


इस दिन की पूजा भव्य हो या सरल, दोनों स्वीकार्य हैं। जरूरी है कि मन में श्रद्धा हो, व्यवहार में शांति हो और प्रकृति के प्रति सम्मान हो।


25 सितंबर 2026 को जब गणेशोत्सव का समापन होगा, तब यह केवल विदाई का दिन नहीं होगा। यह संकल्प लेने का दिन भी होगा कि जीवन में शुभ कर्म, धैर्य और भक्ति को बनाए रखा जाए। बप्पा की विदाई के साथ यही भाव सबसे सुंदर है।


गणपति बप्पा मोरया। अगले बरस तू जल्दी आ।


 
 
 

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